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5 great cricketers of world turned out to be fighters defeated cancer and returned to cricket field | फाइटर निकले दुनिया के ये 5 धाकड़ क्रिकेटर्स, कैंसर को मात देकर क्रिकेट के मैदान पर की वापसी



Cricketers Who Battled Cancer: कैंसर एक ऐसी लड़ाई है जिसके लिए बहुत साहस, शक्ति और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है. पिछले कुछ सालों में कई क्रिकेटरों ने इस जानलेवा बीमारी का सामना किया है. मैदान पर और मैदान के बाहर उनकी लड़ाई की भावना ने लाखों लोगों को प्रेरित किया है. कुछ क्रिकेटरों की जान इस बीमारी के कारण चली गई तो कुछ ने फिर से नई जिंदगी की शुरुआत की. हम उन 5 खिलाड़ियों के बारे में आपको बता रहे हैं जिन्होंने कैंसर से लड़ाई की और उसे जीता.
माइकल क्लार्कऑस्ट्रेलिया के महानतम कप्तानों में से एक माइकल क्लार्क को 2006 में कैंसर का तरा तब हुआ जब डॉक्टरों ने उनके चेहरे पर तीन कैंसरयुक्त त्वचा के धब्बे पाए. क्लार्क ने तुरंत अपने चेहरे और छाती से कैंसरयुक्त धब्बे हटाने के लिए कई सर्जरी करवाईं. तब से वह ऑस्ट्रेलिया में त्वचा कैंसर जागरूकता के लिए एक मजबूत पैरोकार रहे हैं. इसके अलावा 2019 में क्लार्क ने अपने माथे से त्वचा कैंसर को हटाने के लिए सर्जरी करवाई.
मैथ्यू वेडऑस्ट्रेलिया के विकेटकीपर बल्लेबाज मैथ्यू वेड को 16 साल की उम्र में टेस्टिकुलर कैंसर हुआ था. उन्होंने इलाज के बाद कैंसर को मात दी. वेड ने 2021 में ऑस्ट्रेलिया को टी20 वर्ल्ड कप जिताने में अहम भूमिका निभाई थी.
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युवराज सिंहकैंसर से किसी भी क्रिकेटर की लड़ाई युवराज सिंह जितनी मशहूर और प्रेरणादायक नहीं है. 2011 के विश्व कप के हीरो ने गंभीर बीमारी होने के बावजूद 362 रन बनाए और 15 विकेट लेकर प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार जीता. विश्व कप जीतने के तुरंत बादयुवराज को अपने फेफड़ों में एक दुर्लभ जर्म सेल ट्यूमर का पता चला. उन्होंने अमेरिका में गहन कीमोथेरेपी करवाई, कई महीनों तक दर्द और मानसिक संघर्ष से जूझते रहे. लेकिन एक योद्धा की तरह उन्होंने 2012 में वापसी की और भारत के लिए और भी मैच खेले. उनकी यात्रा क्रिकेट की सबसे बड़ी वापसी की कहानियों में से एक है.
ग्रीम पोलाकदक्षिण अफ्रीका के महान बल्लेबाज ग्रीम पोलक को 2013 में कोलोरेक्टल कैंसर का पता चला था. हालांकि, उन्होंने बीमारी से जंग जीत ली, लेकिन वित्तीय बोझ ने उन पर भारी असर डाला. 2014 तक पोलक दिवालिया होने की कगार पर थे. उन्होंने क्रिकेट बोर्ड से मदद मांगी, लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं मिली. आखिरकार उन्होंने एक लाभ रात्रिभोज (बेनिफिट डिनर) का आयोजन किया, जिसमें ग्रीम स्मिथ, शॉन पोलक और माइक प्रॉक्टर जैसे क्रिकेट के कुछ सबसे बड़े नाम शामिल हुए, जिससे उन्हें आगे बढ़ने में मदद मिली.
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ज्योफ्री बॉयकॉटअपनी दमदार बल्लेबाजी और डिफेंस के लिए मशहूर जेफ्री बॉयकॉट को 2003 में गले के कैंसर का पता चलने पर सबसे बड़ा बचाव करना पड़ा. यह खबर भारत के इंग्लैंड दौरे के दौरान आई, जिसके बाद बॉयकॉट को कमेंट्री ड्यूटी से दूर होना पड़ा. बॉयकॉट 35 कठिन रेडियोथेरेपी सत्रों से गुजरे, लेकिन यॉर्कशायर के इस खिलाड़ी ने उस लड़ाई को जमकर लड़ा. एक साल बाद वह कमेंट्री बॉक्स में वापस लौटे और साबित कर दिया कि उन्हें कोई भी चीज रोक नहीं सकती.



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