कानपुर के निर्यातकों को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर दिखने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव और अमेरिका की सक्रिय भूमिका के बाद पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी वजह से सिर्फ पिछले 48 घंटे में कानपुर के करीब 500 करोड़ रुपये के निर्यात ऑर्डर होल्ड पर चले गए हैं।
निर्यातकों का कहना है कि जिन ऑर्डरों की शिपमेंट इस हफ्ते होनी थी, वे अचानक रोक दिए गए। कुछ माल एयर कार्गो के जरिए भेजा जाना था, लेकिन फ्लाइट शेड्यूल में बदलाव और सुरक्षा कारणों से वह एयरपोर्ट पर ही फंस गया। वहीं कई कंटेनर समुद्री रास्ते से भेजे जाने थे, जो अब पोर्ट पर खड़े हैं और आगे की क्लियरेंस का इंतजार कर रहे हैं।
उद्यमियों के मुताबिक कई शिपमेंट पहले ही पैक होकर तैयार थीं। लेदर उत्पाद, फुटवियर, रेडीमेड गारमेंट और केमिकल्स से जुड़े ऑर्डर एयर कार्गो के जरिए भेजे जाने थे। लेकिन जैसे ही युद्ध की खबरें तेज हुईं, विदेशी खरीदारों ने डिलीवरी अस्थायी रूप से रोकने को कहा। इससे माल एयर कार्गो टर्मिनल पर ही अटक गया। समुद्री मार्ग से जाने वाले कंटेनर भी पोर्ट पर फंस गए हैं।
500 करोड़ का मतलब हजारों परिवारों की चिंता
निर्यातकों का कहना है कि 500 करोड़ रुपये के ऑर्डर होल्ड होना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है। इसके पीछे फैक्ट्री मालिकों, कर्मचारियों, पैकिंग स्टाफ, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन से जुड़े हजारों लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है। माल तैयार होने के बाद पेमेंट की उम्मीद रहती है, लेकिन शिपमेंट रुकने से कैश फ्लो अटक गया है। कुछ निर्यातकों ने बताया कि विदेशी कंपनियों ने साफ कहा है कि हालात सामान्य होने तक वे माल रिसीव नहीं करेंगे। इससे गोदामों में स्टॉक बढ़ता जा रहा है और नए ऑर्डर लेने में भी हिचक हो रही है।
फेडरेशन का इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशन के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि फिलहाल सभी की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति पर है। अगर आने वाले कुछ दिनों में तनाव कम हुआ तो ये होल्ड ऑर्डर दोबारा शुरू हो सकते हैं, लेकिन अगर हालात और बिगड़े तो यह 500 करोड़ का झटका आगे और बड़ा नुकसान बन सकता है। सिर्फ 48 घंटे में आया यह असर दिखा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय युद्ध की आंच अब सीधे कानपुर के कारोबार तक पहुंच चुकी है।

