Last Updated:December 30, 2025, 20:48 ISTSultanpur news: यह ऐतिहासिक पुल प्रयागराज, टांडा, बस्ती, गोरखपुर और अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण शहरों के लिए बसों का एक प्रमुख मार्ग है. इसके अतिरिक्त, कादीपुर विधानसभा क्षेत्र के निवासियों के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक पहुँचने का भी यह एकमात्र साधन है. प्रतिदिन हजारों की संख्या में वाहन और लोग इस पुल से गुजरते हैं, जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है.ख़बरें फटाफटसुल्तानपुरः उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर जिला ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण जिला माना जाता है यहां पर आज भी कई ऐसी ऐतिहासिक संरचनाएं और ढांचे मौजूद हैं जो यहां की धरोहर माने जाते हैं. उन्हीं में एक है दोस्तपुर का शाही पुल जो सिर्फ सुल्तानपुर के लोगों के लिए ही नहीं बल्कि कई जिलों के लोगों को लाभ पहुंचती है दरअसल सुल्तानपुर में मौजूद यह शाही पुल सुल्तानपुर और अंबेडकर नगर दो जिलों को जोड़ता है. इसका इतिहास 300 वर्षों से भेजी पुराना माना जाता है.
शाहीपुल का इतिहास
सुल्तानपुर मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर दोस्तपुर कस्बे में बनाया गया प्राचीन शाही पुल सुल्तानपुर और अम्बेडकरनगर जिले की सीमा पर स्थित है जो मुगल काल का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रतीक है. वरिष्ठ पत्रकार विक्रम बृजेंद्र सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि इस पुल का निर्माण मुगलकाल में हुआ था और यह तीन शताब्दियों से भी अधिक समय से खड़ा है.यह पुल न केवल ऐतिहासिक महत्व रखता है, बल्कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद से यह कई महत्वपूर्ण शहरों को जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग भी है.पुल पर लगे फारसी शिलालेख के अनुसार, इसकी मरम्मत मुगल तालुकेदार अली आगा खां द्वारा 1270 हिजरी में करवाई गई थी.
इन जिलों का है प्रमुख मार्ग
यह ऐतिहासिक पुल प्रयागराज, टांडा, बस्ती, गोरखपुर और अयोध्या जैसे महत्वपूर्ण शहरों के लिए बसों का एक प्रमुख मार्ग है. इसके अतिरिक्त, कादीपुर विधानसभा क्षेत्र के निवासियों के लिए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक पहुँचने का भी यह एकमात्र साधन है. प्रतिदिन हजारों की संख्या में वाहन और लोग इस पुल से गुजरते हैं, जिससे इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है. जबसे यह बना तब से इस ऐतिहासिक पुल की कोई बड़ी मरम्मत नहीं हो पाई है, जिसके कारण यह धीरे-धीरे कमजोर होता चला गया. पुल की संरचना जर्जर हो चुकी है.
बना है दुर्घटना का खतरा
लगभग 300 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाने वाला यह पुल आज खस्ताहाल स्थिति में पहुँच चुका है. जिसके कारण यहाँ दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. जानकारों के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व, एक निजी कंपनी द्वारा पुल के किनारे खुदाई करके केबल डालने का कार्य किया गया था.इस खुदाई के बाद से ही पुल की उचित देखरेख नहीं हो पाई. अगले वर्ष, भारी बारिश के कारण पुल की दीवारें कमजोर हो गईं और मिट्टी के कटाव के कारण पुल का एक किनारा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है.About the AuthorRajneesh Kumar Yadavमैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ेंLocation :Sultanpur,Sultanpur,Uttar PradeshFirst Published :December 30, 2025, 20:48 ISThomeuttar-pradesh300 वर्ष पुराना दोस्तपुर के शाही पुल का इतिहास, यूपी के इन जिलों को जोड़ता है

