शाहजहांपुर: रबी की मुख्य फसल गेहूं की इन दिनों बुवाई हो रही है. गेहूं की फसल में उगने वाला खरपतवार गिल्ली-डंडा के लिए एक बड़ी समस्या है. फसल में गिल्ली डंडा जैसे खरपतवार की वजह से उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़ता है. ऐसे में जरूरी है कि खरपतवारों का बेहतर तरीके से प्रबंधन किया जाए. कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि गेहूं की बुवाई के वक्त ही अगर किसान कुछ जरूरी उपाय कर लें तो गेहूं की फसल में खरपतवार नहीं उगेंगे. किसानों को कम लागत में अच्छा उत्पादन मिलेगा.कृषि विज्ञान केंद्र नियामतपुर में तैनात कृषि एक्सपर्ट डॉ एनपी गुप्ता ने बताया कि खरपतवार पौधों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं. जिससे पौधों को मिलने वाला पोषण, पानी और प्रकाश प्रभावित होता है. जिससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है और 30% तक उत्पादन पर भी असर पड़ता है. ऐसे में जरूरी है कि किसान बुवाई के वक्त ही खरपतवारनाशी पायरोक्सासल्फोन 85% डब्ल्यू.जी. (Pyroxasulfone 85% WG) का इस्तेमाल कर लें. जिससे खरपतवार को उगने से रोका जा सकता है और अगर खरपतवार उगते भी हैं तो वह सिंचाई के वक्त खुद ही मर जाते हैं.बुवाई के 72 घंटे बाद करें इस्तेमालखरपतवारनाशी पायरोक्सासल्फोन का इस्तेमाल करने के लिए जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए. गेहूं की बुवाई के बाद पटेला लगाने से 72 घंटे के बाद पायरोक्सासल्फोन 85% दवा का इस्तेमाल करना चाहिए. 60 ग्राम पायरोक्सासल्फोन को 250 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव कर दें.कैसे करें दवा का छिड़काव?खरपतवारनाशी पायरोक्सासल्फोन मिट्टी के ऊपर एक परत बना लेता है. जिसकी वजह से खरपतवार के बीज का जमाव नहीं हो पाता और अगर कोई खरपतवार उग भी आता है तो पहली सिंचाई के दौरान ही वह खुद मर जाता है. लेकिन जरूरी है कि मिट्टी के ऊपर बनी हुई परत ना टूट पाए, खरपतवारनाशी का छिड़काव करते समय किसानों को साइड की ओर चलना चाहिए या फिर पीछे की ओर छिड़काव करते हुए चलें.FIRST PUBLISHED : December 1, 2024, 20:08 IST
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