उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में एक ऐतिहासिक लकड़ी का दरवाजा है, जो 50 साल से भी अधिक पुराना है. यह दरवाजा नीम और आम की लकड़ी से बना है, जिसमें 24 कोठियों, 6 मछली की आकृतियों और बारीक नक्काशी के साथ सजाया गया है. चांदी रंगी पी और कलश-फूल की डिज़ाइन इसे और भी अद्भुत बनाती है. यह दरवाजा एक व्यक्ति के मकान में दरवाजे के रूप में लगा हुआ है और इसकी लंबाई और चौड़ाई काफी बड़ी है. इसमें कलश और नक्काशी की हुई है, मछलियों का निशान बना हुआ है, जो कि 6 हैं और 24 कोठा बनाए गए हैं और कई अन्य खासियत भी हैं जो इस दरवाजे को और भी विशेष बनाती हैं.
इस लकड़ी का बना है दरवाजा मकान मालिक राजेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि यह दरवाजा 50 वर्षों से भी अधिक पुराना हो चुका है. इसमें दो लकड़ी का इस्तेमाल किया गया है. दरवाजे के फ्रेम को नीम की लकड़ी से बनाया गया है, वहीं इसके पल्ले को आम की लकड़ी से तैयार किया गया है. यह लकड़ी काफी मजबूत है और आज तक इसमें ना तो कोई दीमक लगा है और ना ही किसी प्रकार का कोई घुन लगा है या जैसे 50 साल पहले थी वैसे आज भी है. यह दरवाजा अपने आप में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कल का परिचय दे रहा है.
इस ऐतिहासिक दरवाजे में कई आकृतियां बनी है जिसमें 24 लकड़ी के छोटे-छोटे कोठी बनाए गए हैं, 6 मछली की आकृति बनाई गई है और इसमें छोटे-छोटे नुकीले पी लगाए गए हैं, जिनको चांदी के रंग में रंग गया है. इसके साथ ही इसमें 12 कड़ियों वाली जंजीर भी लगाई गई है. दरवाजे के बाजू में कलश और फूलों की आकृतियां बनी है, बारीक नक्काशियों से तैयार यह दरवाजा अपने आप में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कल का परिचय दे रहा है. इस दरवाजे को बनाने के लिए दो मिस्त्री लगे हुए थे, पहले मिस्त्री जायस क्षेत्र के थे और दूसरे छोटेपुर गांव के शीतला प्रसाद विश्वकर्मा ने इसे नक्काशी से तैयार किया था. आज के 50 साल पहले इस दरवाजे की कीमत लगभग ₹12000 थी और वर्तमान में इसकी कीमत 70000 रुपए से भी अधिक है लेकिन आम और नीम की लकड़ी से बनाया गया दरवाजा अपने आप में अद्भुत है.

