Last Updated:January 21, 2026, 15:49 ISTEmotional Love Stroy: शाहजहांपुर की धरती सिर्फ वीर शहीदों के लिए नहीं, बल्कि एक अनोखी प्रेम कहानी के लिए भी जानी जाती है. 1857 की क्रांति के बीच उपजी यह कहानी रोहिला सैनिक मंगल खान और अंग्रेज किशोरी रूथ की है. युद्ध और हिंसा के बीच पनपा यह प्यार इतनी गहरी संवेदना थी कि इसे रस्किन बांड ने ‘ए फ्लाइट ऑफ पिजन्स’ में और श्याम बेनेगल ने ‘जुनून’ फिल्म में भी अमर किया.शाहजहांपुर: यूपी के शाहजहांपुर की धरती न केवल शहीदों की वीरता के लिए, बल्कि एक ऐसी प्रेम कहानी के लिए भी जानी जाती है जिसने सरहदों और मजहब की दीवारों को लांघ दिया था. 1857 की क्रांति की आग के बीच उपजी यह दास्तान रोहिला सैनिक मंगल खान और अंग्रेज किशोरी रूथ की है. यह केवल एक तरफा आकर्षण नहीं, बल्कि युद्ध के शोर में दबी एक मानवीय संवेदना भी थी. इस कहानी की गहराई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विख्यात लेखक रस्किन बांड ने इस पर ‘ए फ्लाइट ऑफ पिजन्स’ उपन्यास लिखा और श्याम बेनेगल ने ‘जुनून’ जैसी फिल्म बनाई.
एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने बताया कि इस कहानी की शुरुआत 31 मई 1857 को हुई, जब शाहजहांपुर के सेंट मैरी चर्च में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी अधिकारियों पर हमला किया. इस हमले में रूथ के पिता मिस्टर लैमिस्टियर मारे गए. डॉ खुराना बताते हैं कि मंगल खान रूथ के प्रति इस कदर फिदा था कि उसने रूथ और उसकी मां मरियम को सुरक्षा देने के बहाने अपने घर में रखा. मंगल खान विवाहित था और उसके घर में इस रिश्ते को लेकर काफी कलह भी हुई, लेकिन उसने अंत तक रूथ के प्रति सम्मान और अपनी मोहब्बत को कायम रखा.
क्रांति के बीच पनपा एकतरफा जुनूनमंगल खान का रूथ के प्रति प्रेम किसी जुनून से कम नहीं था. जब शहर में कत्लेआम मचा था, तब रूथ और उसकी मां ने एक सेठ के घर शरण ली थी. मंगल खान ने जोखिम उठाकर उन्हें वहां से निकाला और अपने घर ले आया. वह रूथ से निकाह करना चाहता था, लेकिन उसकी पहली पत्नी इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थी. रोचक बात यह है कि कट्टर दुश्मन होने के बावजूद मंगल खान ने रूथ और मरियम को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि उन्हें अपने घर में पूरी गरिमा और सुरक्षा के साथ रखा, जो उस दौर के युद्ध उन्माद में दुर्लभ था.
अधूरा रह गया मंगल ख़ान का प्यार किस्मत को मंगल खान की यह चाहत मंजूर नहीं थी. एक दिन जब रूथ और उसकी मां अपने घर की छत पर खड़ी थीं, तभी वहां से निकल रही एक अंग्रेज सेना की टुकड़ी ने उन्हें पहचान लिया और वे उन्हें अपने साथ ले गए. इसके साथ ही मंगल खान की प्रेम कहानी हमेशा के लिए अधूरी रह गई. बाद के वर्षों में मरियम की मृत्यु बनारस में हुई और रूथ वापस इंग्लैंड चली गई, जहां कुछ ही वर्षों बाद उसने भी दम तोड़ दिया. आज यह कहानी शाहजहांपुर की फिजाओं में एक ऐसी कसक की तरह जिंदा है.About the AuthorSeema Nathसीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ेंLocation :Shahjahanpur,Uttar PradeshFirst Published :January 21, 2026, 15:49 ISThomeuttar-pradeshवो सैनिक, जो दुश्मन की बेटी के प्यार में हो गया था दीवाना, जानें कहानी

