Last Updated:June 13, 2025, 17:27 ISTएक समय था जब हर घर में सिलाई मशीन की आवाज सुनाई देती थी. आज भले ही तकनीक बदल गई हो, मगर आगरा के कमला नगर निवासी कुलदीप सिंह वर्मा आज भी इस विरासत को संजोए हैं. उनके पास 150 साल पुरानी 70 से अधिक दुर्लभ सिलाई मशीनें सुरक्षित हैं. एक दौर था जब हर घर में सिलाई मशीन की खटर- पटर आम थी. समय बदला, तकनीक आई, लेकिन आगरा के कमला नगर निवासी कुलदीप सिंह वर्मा आज भी इस विरासत को संजोए हैं. उनके पास 150 साल पुरानी 70 से अधिक दुर्लभ सिलाई मशीनें आज भी सुरक्षित रखी गई हैं. कुलदीप वर्मा पिछले 10 सालों से अपने पिता ओमप्रकाश वर्मा की विरासत को सहेज रहे हैं. उनके पिता सिलाई मशीनों की मरम्मत में माहिर थे. यही लगाव कुलदीप में भी आया और उन्होंने देशी- विदेशी ब्रांड की दुर्लभ सिलाई मशीनों को संग्रहित करना शुरू कर दिया. कुलदीप वर्मा के संग्रह में अमेरिका, जर्मनी, जापान और इंग्लैंड सहित कई देशों की ऐतिहासिक सिलाई मशीनें मौजूद हैं. इनमें टाइटन की बोट शटल (मॉडल 12K) और सिंगर की 125 साल पुरानी बुलेट शटल मशीनें शामिल हैं. कुछ मशीनें नाव जैसी हैं, तो कुछ शटल ट्रेनों जैसी दिखती हैं. आज भी जब कुलदीप वर्मा को कहीं कोई एंटीक सिलाई मशीन मिलती है, तो वे उसे तुरंत खरीद लेते हैं. उनके घर का एक कमरा इन दुर्लभ मशीनों के संग्रह को समर्पित है. खास बात यह है कि वे आज भी सिलाई मशीनों की मरम्मत करते हैं और यूनिक मॉडल मिलने पर निःशुल्क सेवा भी देते हैं. कुलदीप वर्मा बताते हैं कि दुनिया की पहली सिलाई मशीन 1790 में थॉमस सेंट ने लंदन में बनाई थी. उनके पास हथेली के आकार की एक दुर्लभ मशीन का मॉडल भी मौजूद है. खास बात यह है कि उन्होंने मिट्टी से सिलाई मशीन का हूबहू एक मिनिएचर मॉडल भी खुद तैयार किया है. सिलाई मशीनों के प्रति कुलदीप वर्मा का प्रेम आज भी उतना ही गहरा है, जितना उनके पिता का हुआ करता था. राष्ट्रीय सिलाई मशीन दिवस पर ऐसे लोगों को देखना सचमुच प्रेरणादायक है, जो न सिर्फ इतिहास को संजोए हुए हैं. बल्कि नई पीढ़ियों को विरासत और शौक का महत्व भी सिखा रहे हैं.homeuttar-pradeshAgra News: आगरा के इस शख्स ने बनाया अनोखा सिलाई संग्रह, देखें तस्वीरें
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