Uttar Pradesh

10,000 किलो फूलों की बरसात में डूबा कानपुर का इस्कॉन, वृंदावन, मथुरा और बरसाना की होली जैसा नजारा

कानपुर में वृंदावन की होली का अनोखा अनुभव

कानपुर में इस्कॉन मंदिर में आयोजित होली उत्सव ने देशभर में जानी जाने वाली मथुरा वृंदावन और बरसाना की होली की याद दिलाई। यहां पर त्योहार के साथ भक्ति की एक अलौकिक तस्वीर भी देखने को मिली। कानपुर के मीनावती मार्ग स्थित इस्कॉन मंदिर में फूलों की होली के रंग में पूरी तरह माहौल सजा हुआ नजर आया।

मंदिर में शाम से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उभरने लगी थी। कानपुर के अलावा आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में हजारों लोग इस अनोखे उत्सव का हिस्सा बनने के लिए पहुंचे। यहां पर भक्ति संगीत कीर्तन और फूलों की खुशबू से पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंगा हुआ दिखाई दिया।

जैसे ही उत्सव शुरू हुआ, श्रद्धालुओं पर फूलों की वर्षा होने लगी और लोग भक्ति भाव से झूम उठे। इस्कॉन टेंपल में आयोजन को लेकर खास तैयारी की गई थी। इस बार मंदिर प्रबंधन ने फूलों की होली को पहले से कई अधिक भव्य बनाने की तैयारी की थी। आयोजन के लिए करीब 10000 किलो से अधिक फूलों की व्यवस्था की गई थी। खास बात यह रही कि इनमें से कई फूल विदेश से भी मांगे गए थे। सिंगापुर और मलेशिया के साथ-साथ पुणे और बेंगलुरु से भी रंग बिरंगे फूल विशेष तौर पर भेजे गए थे।

होली उत्सव के मौके पर मंदिर के मुख्य विग्रह श्री श्री राधा माधव श्री श्री गौर निताई और श्री श्री जानकी वल्लभ लक्ष्मण हनुमान जी का विशेष पुष्प श्रृंगार किया गया। ताजा और रंगीन फूलों से साए में विग्रहों के दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों की लंबी कथा दे नजर आई। श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ इस्कॉन टेंपल में भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हुए नजर आए।

कानपुर के इस्कॉन टेंपल में आयोजित किए गए उत्सव में सबसे ज्यादा आकर्षक वृंदावन से आई विशेष कीर्तन मंडली का रहा। ब्रज के कलाकारों ने जब मृदंग और करतल की ताल पर हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन शुरू किया तो पूरा परिसर भक्ति में हो उठा। कीर्तन की धो के साथ फूलों की वर्षा ने माहौल को और भी अलौकिक बना दिया। श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते और नाचते हुए नजर आए।

कार्यक्रम में सिर्फ कानपुर नहीं बल्कि अलग-अलग शहरों से श्रद्धालु पहुंचे थे। सभी ने इस आयोजन को यादगार बताया। बेंगलुरु से आई श्रद्धालु ईशा गुप्ता ने बताया कि यह अनुभव उनके बेहद खास रहा। उन्होंने कहा कि रंगों की होली से अलग यह उत्सव ज्यादा आध्यात्मिक और आनंद देने वाला है। कई अन्य श्रद्धालुओं ने कहा कि इस्कॉन मंदिर का यह आयोजन उन्हें मथुरा वृंदावन और बरसाना की होली की याद दिलाता है।

इस बार भी भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया था। श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए गए थे ताकि किसी भी प्रकार की कोई आवश्यकता ना हो। स्वयं सेवकों की बड़ी टीम पूरे समय व्यवस्था संभालती रही और श्रद्धालुओं की मदद करती रही। इसके अलावा साफ सफाई और सुरक्षा के भी पर्याप्त इंतजाम किए गए थे जिससे लोग आराम से कार्यक्रम का आनंद ले सकें।

इस खास उत्सव के समापन पर आए हुए सभी श्रद्धालुओं को विशेष कृष्ण प्रसाद वितरित किया गया। प्रसाद ग्रहण करने के बाद भक्तों ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर इस्कॉन के जोनल सेक्रेटरी देवकीनंदन प्रभु और मंदिर अध्यक्ष प्रेम हरि नाम प्रभु समेत कई प्रमुख सदस्य मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि फूलों की होली का उद्देश्य लोगों को भक्ति प्रेम और आध्यात्मिक आनंद से जोड़ना है।

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