यूपी के बहराइच में रहने वाले किसान हाजी चौधरी बागबान की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण है जो पूर्वजों के जमाने की एक खास फसल उगाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि सोये की खेती मुनाफे का सौदा है, जिसमें कभी नुकसान नहीं होता है। दो से तीन कटाई बड़े आराम से हो जाती है, और मार्केट में डिमांड भी खूब होती है।
बहराइच शहर के मोहल्ला नजीरपुरा में रहने वाले किसान हाजी चौधरी बागबान, सब्जियां उगाने के साथ-साथ सोये की खेती भी करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि सोये की खेती मुनाफे का सौदा है जिसमें कभी नुकसान नहीं होता है। चौधरी बागबान कहते हैं कि हमारे पूर्वज भी इसे उगाया करते थे और हमें भी उगाने की सलाह दिया करते थे। हाजी चौधरी बागबान जब छोटे थे, तब अपने दादा के साथ खेत जाया करते थे। दादा हमेशा समझते कि सोये का साथ कभी मत छोड़ना क्योंकि सोया सीजन से पहले और सीजन के बाद, दोनों समय अच्छा मुनाफा देता है। ज्यादा देखरेख करने की जरूरत भी नहीं होती है।
कितनी लागत?
लोकल 18 से बात करते हुए किसान चौधरी बागवान बताते हैं कि सोये की खेती अगर बड़े पैमाने पर की जाए तो मुनाफा बड़ा हो जाता है। एक बीघे में लागत चार से पांच हजार रुपये आती है, और मुनाफा तीन से चार गुना आराम से हो जाता है। सीजन आने पर काटते रहिए और बेचते रहिए। बीच में भाव अच्छा मिल जाने पर किसान की चांदी भी हो जाती है। यही वजह है कि हमारे पूर्वजों ने सोये का साथ कभी नहीं छोड़ा और अब हमने भी इसको कंटिन्यू कर रखा है। सोये के बल पर हमने अपने बच्चों को पढ़ाया, लिखया, शादी की। नाम कमाया।
खेत से ही हो जाता चटक
सान चौधरी बागबान बताते हैं कि उन्हें सोया कभी मंडी में ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती है। साग-सब्जी बेचने वाले, उनके खेत पर ही आकर खरीद ले जाते हैं। मजदूर लगाकर कटवाना भी नहीं पड़ता है। खुद ही अपने हाथों से काटकर ले जाते हैं। इससे मंडी लाने ले जाने की झंझट नहीं होती। खर्च भी बच जाता है।

